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Rishto Ko Kaise Samhalein?

रिश्तो को सम्हालने के लिए आप कुछ ऐसे तरीके अपना सकते हैं:

कम्युनिकेशन: सबसे इम्पोर्टेन्ट बात है की आप अपने पार्टनर से ओपन एंड ऑनेस्ट कम्युनिकेशन रखे. आपको अपनी फीलिंग्स थॉट्स एंड कंसर्नस शेयर करनी चाहिए.

पेशेंस: रिश्तो में सब कुछ ठीक से नहीं होते आपको सब कुछ के लिए पेशेंस रखना होगा. आपको समझना होगा की सब कुछ ठीक नहीं हो सकता हर वक़्त.

एम्पथी: रिश्तो में एम्पथी का होना बहुत ज़रूरी है. आपको अपने पार्टनर के फीलिंग्स को समझना होगा और उनके साथ रहना होगा.

ट्रस्ट: रिश्तो में ट्रस्ट का होना बहुत ज़रूरी है. आपको अपने पार्टनर पर भरोसा रखना होगा और उनके डिशन्स पर भी ट्रस्ट रखना होगा.

कोम्प्रोमाईज़: रिश्तो में कोम्प्रोमाईज़ का होना बहुत ज़रूरी है. आपको अपने ोपीनियंस नीड्स और वांट्स के साथ साथ अपने पार्टनर के ोपीनियंस नीड्स और वांट्स को भी कंसीडर करना होगा.

क्वालिटी टाइम: रिश्तो में क्वालिटी टाइम स्पेंड करना बहुत ज़रूरी है. आपको अपने पार्टनर के साथ टाइम स्पेंड करके उनके साथ कनेक्ट करना होगा.

सपोर्ट: रिश्तो में सपोर्ट का होना बहुत ज़रूरी है. आपको अपने पार्टनर के साथ हमेशा उनके डिशन्स और एक्शन्स में सपोर्ट करना होगा.

फोर्गीवेनेस्स: रिश्तो में फोर्गीवेनेस्स का होना बहुत ज़रूरी है. आपको अपने पार्टनर के मिस्टेक्स को माफ़ कर देना होगा और उनके साथ मूव ों करना होगा. 

यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि हर रिश्ता अलग होता है और एक जोड़े के लिए जो काम करता है वह दूसरे के लिए काम नहीं कर सकता है। ये केवल सामान्य दिशानिर्देश हैं और यह समझने के लिए कि आप दोनों के लिए सबसे अच्छा क्या है, अपने साथी के साथ खुले तौर पर संवाद करना महत्वपूर्ण है।

yeh rishte hai pyar ke - episode 2 - helping each other strengthen the relationship | एक दूसरे का हाथ बंटाना रिश्ते को मजबूती देता है


 इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप पति पत्नी है गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड है या लिव इन रिलेशनशिप में है। अगर आप एक दूसरे के काम की कदर नहीं करते तो कहीं ना कहीं आप एक दूसरे को अहमियत नहीं दे रहे हैं। तो यह रिश्ता ज्यादा लंबे समय तक नहीं टिक पाएगा। हमेशा एक दूसरे के काम की कद्र करनी चाहिए क्योंकि सभी को अपना काम महत्वपूर्ण ही लगता है। और ऐसा होता भी है हर काम महत्वपूर्ण होता है। कोई भी छोटा या बड़ा नहीं होता। जब आप किसी चीज को नापते और तोलते हैं, तो आप एक पैमाना बना रहे होते हैं, और आपकी जिंदगी संकुचित हो जाती है।

आप हमेशा अगर अपने काम को महत्वपूर्ण और दूसरे के काम को छोटा समझें या आसान समझे तो आप एक बड़ी गलती कर रहे हैं। अक्सर देखा जाता है कि पति सिर्फ इसलिए घर के कामों में अपनी पत्नी की छोटी मोटी मदद भी नहीं करते कि वह यह सोचते हैं कि उनका काम ज्यादा मुश्किल और महत्वपूर्ण है और उनकी पत्नी का काम आसान और सस्ता है। यह संवाद तो बहुत ही आम है कि सारा दिन तुम करती ही क्या हो भले। ही छुट्टी वाले दिन पति घर में सारे दिन बैठा रहे, लेकिन वह मदद नहीं करना पसंद करेगा। क्योंकि उसको यही लगेगा कि मेरी पत्नी का काम तो बहुत आसान है और मेरा काम बहुत मुश्किल है।

बहुत से मर्द ऐसे भी होते हैं जो अपना काम करने के साथ-साथ अपनी पत्नी की मदद भी करते हैं। और बहुत सी पत्नियां ऐसी होती हैं, जो अपना काम करने के साथ-साथ अपने पति की भी मदद करती हैं। लेकिन इस मामले में ज्यादातर हाउसवाइफ यानी घरेलू स्त्रियां अपने पति के काम नहीं कर पाती। तो इसीलिए उनके पति उनकी मदद करने से हिचकते हैं। उनके पास यह बहाना होता है कि जब यह मेरी मदद नहीं कर सकती तो मैं इसकी क्यों करूं। यहीं पर हम स्वार्थी और मतलबी हो जाते हैं और रिश्ते के मायने हमारे लिए नहीं होते हैं।

यदि हम सिर्फ अपने ही बारे में सोचते रहे तो वह रिश्ता रिश्ता नहीं होता, वह एक समझौता होता है। और यह इंसान के ऊपर निर्भर करता है कि वह जिंदगी को किस तरह से जीना चाहता है। अगर आप एक प्यार भरी अच्छी जिंदगी जीना चाहते हैं तो देने की कला सीखनी है। सिर्फ पाने से प्यार नहीं रहता, वह लालच और समझौता होता है, तो अगर आप समझौते भरी जिंदगी जीना चाहते हैं तो वैसे ही जिंदगी आप जी सकते हैं। लेकिन अगर आप चाहते हैं कि आप की पत्नी या पति आपसे प्यार करे तो आप देना सीखिए। देने में सिर्फ पैसा ही नहीं मानसिक सांत्वना, हाथ बटाना, और भी बहुत कुछ आता है।

हमारे देश में ऐसा कम ही होता है, लेकिन आमतौर पर लेकिन कई जगह पर देखा जाता है की पत्नियां बाहर का काम करती हैं और पति घर के घरेलू काम करते हैं। ऐसे में पत्नी भी वही व्यवहार करती है जो ज्यादातर हर पति करता है। वह अपने पति के काम में हाथ नहीं बंटाती है, और उसके अंदर एक अहंकार आ जाता है कि वह पैसे कमा रही है। क्योंकि हमारे देश में बहुत कम स्त्रियां ऐसा करती हैं। पश्चिमी देशों में यह आम बात है यहीं पर हम मात खा जाते हैं। तो यह बात दोनों पर लागू होती है।

यदि आप पत्नी की किसी भी काम में मदद नहीं करते हैं तो आप उसको मानसिक रूप से तोड़ रहे हैं। उसको आप यह जता रहे हैं कि उसका काम आसान है और दोयम दर्जे का है। और आपका काम महान है। आप ऐसा करना नहीं चाहते हैं पर आप ना चाहते हुए भी ऐसा कर रहे हैं। तो इस रवैये को आप को बदलना होगा। 

आप यदि अपनी पत्नी को काम में मदद करेंगे तो वह मानसिक रूप से ज्यादा स्वस्थ रहेगी और खुश रहेगी, और उसके खुश होने पर ही पूरे घर में खुशहाली आएगी। आपके बच्चों का भी मानसिक स्वास्थ्य सही रहेगा। क्योंकि देखा जाता है कि ज्यादातर ऐसी स्त्रियां जो अपने पति की मानसिक और शारीरिक मदद चाहती हैं, वह ना मिलने पर वह चिड़चिड़ी हो जाती हैं और सारा गुस्सा उनके बच्चों पर निकलता है। जिससे बच्चों का भी मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है।

तो यह कोई मुश्किल कार्य नहीं है। यदि आप ऐसा करने लगते हैं तो कुछ दिनों बाद आपको लगता है कि आप क्या खो रहे थे। आपको अपनी पत्नी या फिर अपने पति के चेहरे पर संतोषजनक मुस्कान दिखेगी जो आपको अंदर से खुश कर देगी। मनोचिकिस्तकीय यानी कि साइकोलॉजिकली यह चीज आपको तन और मन से स्वस्थ रखेगी, और स्वस्थ तन और मन धन भी देते हैं। तो आपके जीवन में कुल मिलाकर धीरे-धीरे खुशहाली ही आएगी।

yeh rishte hai pyar ke - episode 1 - taking care of relationship | ये रिश्ते हैं प्यार के - रिश्ते को कैसे बचाएँ

yeh rishte hai pyar ke - episode 1
 

कभी-कभी ऐसा होता है कि पुराने से पुराना, गहरे से गहरा रिश्ता एक ऐसे दोराहे पर खड़ा हो जाता है, जब अलगाव होने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचता। तो ऐसा क्या होता है जो ऐसी स्थिति आती है? इसका सिर्फ एक ही कारण है और वह है 'अहंकार'।

जब दो लोग अच्छे होते हैं, तभी वह गहरा रिश्ता बना पाते हैं। और अच्छे लोग कभी बुरा काम नहीं करते। और अगर कर भी दिया है तो वह जानबूझकर नहीं करते। लेकिन दूसरा इसे किस तरह से लेता है यह उस पर निर्भर करता है। तो अगर रिश्ते में किसी एक ने कुछ गलत कर दिया हो तो दूसरे को हमेशा माफ कर देना चाहिए। क्योंकि जानबूझकर तो कोई अपने का बुरा नहीं करेगा या किसी का भी बुरा नहीं करेगा। तो गहरे से गहरे रिश्ते के टूट जाने की वजह अहंकार के अलावा और कोई हो ही नहीं सकती। 

आपसी समझदारी भी बहुत मायने रखती है। आपसी समझदारी होती है तो गलतफहमियां भी नहीं होती। हमारी एक दूसरे को समझने की कला भी मायने रखती है। सिर्फ गहरे रिश्ते से होने से काम नहीं चलता। इस रिश्ते में समझदारी, बुद्धिमत्ता और धैर्य भी होना चाहिए। अगर इनमें से एक ही चीज हो तो रिश्ता टूट सकता है। अगर यह सारी चीजें हो तो रिश्ता इतनी आसानी नहीं टूटेगा। 

रिश्ता टूटने की कई वजहें हो सकती हैं। गलतफहमी होना, गलती होना, अहंकार का टकराव होना। 

तो गलतफहमी होना इसकी भी कई वजहें हो सकती हैं। गलतफहमी तब उपजती है जब आप एक दूसरे को पूरी तरह से नहीं समझते, और सिर्फ किस्मत के भरोसे गहरे रिश्ते पर चल रहे होते हैं। एक पल आता है और आप गलतफहमी के शिकार हो जाते हैं। तो इसके लिए आपके अंदर बुद्धिमत्ता और समझदारी होनी चाहिए तभी आप गलतफहमी से बच पाएंगे या उसको सुलझा पाएंगे। 

कहते हैं एक हाथ से ताली नहीं बजती। दोनों तरफ से अगर अहंकार का टकराव हो तो रिश्ते का बचना मुश्किल है। अगर एक भी इंसान संभल जाए तो रिश्ता बच जाता है। तो अगर यह बात हर इंसान समझ लेगा तो एक की जगह दोनों ही समझ जाएंगे और उनका रिश्ता कभी नहीं टूटेगा।

अगर आप किसी पर विश्वास करते हैं तो पूरी तरह से विश्वास कीजिये। अगर नहीं तो बिलकुल नहीं। मंझधार में रहने वाला व्यक्ति कभी खुश नहीं रह पाता। 

अगर अगर आप किसी पर पूरी तरह से भरोसा करते हैं और वो कही किसी जिंदगी के मोड़ पर आपका भरोसा तोड़ देता है तो आपको उसे माफ़ करके एक मौका और देना चाहिए। अगर उसके बाद भी वह गलती करता है (जानबूझकर) तो फिर आपके विकल्प साफ़ होने चाहिए। 

छोटी छोटी बातों पर अहंकार ना करके ये सोचना चाहिए की सिर्फ आप अपनी ही सोचेंगे तो दूसरे को भी पूरा अधिकार है की वो भी अपने ही बारे में सोचे। अगर आप विरल हो जाते हैं और अहंकार नहीं करते तो दूसरा भी कठोर और अहंकारी होने से बचता है क्योंकि उसे अच्छा नहीं लगता की सामने से व्यक्ति मृदुल है और हम अहंकार कर रहे हैं। वो अलग बात है की कभी कभी किसी का मिजाज किसी वजह से गर्म या बुरा हो जाता है और वह आपकी छोटी सी चुभने वाली बात पर भी बुरी तरह से प्रतिक्रिया करता है। 

तो आपको इसी जगह पर अपने धैर्य का परिचय देते हुए किसी बुद्धिमान इंसान की तरह पेश आना चाहिए। आप देखेंगे की वो इंसान थोड़ी ही देर बाद अपने बर्ताव के लिए आपसे माफ़ी मांगेगा। लेकिन इसके उलट यदि आप वैसी ही तीखी प्रतिक्रिया देते हैं, तो माफ़ी की उम्मीद छोड़ दीजिये। लड़ाई अहंकार की लड़ाई में परिवर्तित हो जाएगी और लम्बी खिंचेगी और इसकी निष्पत्ति रिश्ते में दरार पड़ने, रूखापन आने यहाँ तक की टूटने तक की नौबत आ जाती है। 

आज के दौर में प्रतिस्पर्धा, चकाचौंध और नीरसता की वजह से इंसान चिड़चिड़ा और अहंकारी हो चुका है। आपसी रिश्ते में रोजमर्रा की लड़ाइयां और लम्बे समय तक बातचीत का रुक जाना इन्ही मानसिक स्थितियों के कारण होता है। रोजाना ध्यान मैडिटेशन करने से मानसिक स्थिति सुधरती है।

जीवन में हमेशा आशावादी होना चाहिए। यदि आप या आपका साथी किसी कुंठा में जी रहा है तो उसका साथ दीजिये। ना की उसके व्यवहार के बारे में शिकायती हो जाइये। हर चीज़ की एक वजह होती है। जो आप देंगे वही वापस मिलेगा।

यदि आप आशावादी, शांत, विवेकशील हो जाते हैं तो आपके रिश्ते आजीवन चलने वाले, प्रेम और वफादारी से भरे हुए ही रहेंगे।

आशा करता हूँ की yeh rishte hai pyar ke का ये लेख आपको पसंद आया होगा। आगे भी इसी तरह के लेख आते रहेंगे। आप हमारे ब्लॉग से जुड़ सकते हैं.