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| yeh rishte hai pyar ke - episode 1 |
कभी-कभी ऐसा होता है कि पुराने से पुराना, गहरे से गहरा रिश्ता एक ऐसे दोराहे पर खड़ा हो जाता है, जब अलगाव होने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचता। तो ऐसा क्या होता है जो ऐसी स्थिति आती है? इसका सिर्फ एक ही कारण है और वह है 'अहंकार'।
जब दो लोग अच्छे होते हैं, तभी वह गहरा रिश्ता बना पाते हैं। और अच्छे लोग कभी बुरा काम नहीं करते। और अगर कर भी दिया है तो वह जानबूझकर नहीं करते। लेकिन दूसरा इसे किस तरह से लेता है यह उस पर निर्भर करता है। तो अगर रिश्ते में किसी एक ने कुछ गलत कर दिया हो तो दूसरे को हमेशा माफ कर देना चाहिए। क्योंकि जानबूझकर तो कोई अपने का बुरा नहीं करेगा या किसी का भी बुरा नहीं करेगा। तो गहरे से गहरे रिश्ते के टूट जाने की वजह अहंकार के अलावा और कोई हो ही नहीं सकती।
आपसी समझदारी भी बहुत मायने रखती है। आपसी समझदारी होती है तो गलतफहमियां भी नहीं होती। हमारी एक दूसरे को समझने की कला भी मायने रखती है। सिर्फ गहरे रिश्ते से होने से काम नहीं चलता। इस रिश्ते में समझदारी, बुद्धिमत्ता और धैर्य भी होना चाहिए। अगर इनमें से एक ही चीज हो तो रिश्ता टूट सकता है। अगर यह सारी चीजें हो तो रिश्ता इतनी आसानी नहीं टूटेगा।
रिश्ता टूटने की कई वजहें हो सकती हैं। गलतफहमी होना, गलती होना, अहंकार का टकराव होना।
तो गलतफहमी होना इसकी भी कई वजहें हो सकती हैं। गलतफहमी तब उपजती है जब आप एक दूसरे को पूरी तरह से नहीं समझते, और सिर्फ किस्मत के भरोसे गहरे रिश्ते पर चल रहे होते हैं। एक पल आता है और आप गलतफहमी के शिकार हो जाते हैं। तो इसके लिए आपके अंदर बुद्धिमत्ता और समझदारी होनी चाहिए तभी आप गलतफहमी से बच पाएंगे या उसको सुलझा पाएंगे।
कहते हैं एक हाथ से ताली नहीं बजती। दोनों तरफ से अगर अहंकार का टकराव हो तो रिश्ते का बचना मुश्किल है। अगर एक भी इंसान संभल जाए तो रिश्ता बच जाता है। तो अगर यह बात हर इंसान समझ लेगा तो एक की जगह दोनों ही समझ जाएंगे और उनका रिश्ता कभी नहीं टूटेगा।
अगर आप किसी पर विश्वास करते हैं तो पूरी तरह से विश्वास कीजिये। अगर नहीं तो बिलकुल नहीं। मंझधार में रहने वाला व्यक्ति कभी खुश नहीं रह पाता।
अगर अगर आप किसी पर पूरी तरह से भरोसा करते हैं और वो कही किसी जिंदगी के मोड़ पर आपका भरोसा तोड़ देता है तो आपको उसे माफ़ करके एक मौका और देना चाहिए। अगर उसके बाद भी वह गलती करता है (जानबूझकर) तो फिर आपके विकल्प साफ़ होने चाहिए।
छोटी छोटी बातों पर अहंकार ना करके ये सोचना चाहिए की सिर्फ आप अपनी ही सोचेंगे तो दूसरे को भी पूरा अधिकार है की वो भी अपने ही बारे में सोचे। अगर आप विरल हो जाते हैं और अहंकार नहीं करते तो दूसरा भी कठोर और अहंकारी होने से बचता है क्योंकि उसे अच्छा नहीं लगता की सामने से व्यक्ति मृदुल है और हम अहंकार कर रहे हैं। वो अलग बात है की कभी कभी किसी का मिजाज किसी वजह से गर्म या बुरा हो जाता है और वह आपकी छोटी सी चुभने वाली बात पर भी बुरी तरह से प्रतिक्रिया करता है।
तो आपको इसी जगह पर अपने धैर्य का परिचय देते हुए किसी बुद्धिमान इंसान की तरह पेश आना चाहिए। आप देखेंगे की वो इंसान थोड़ी ही देर बाद अपने बर्ताव के लिए आपसे माफ़ी मांगेगा। लेकिन इसके उलट यदि आप वैसी ही तीखी प्रतिक्रिया देते हैं, तो माफ़ी की उम्मीद छोड़ दीजिये। लड़ाई अहंकार की लड़ाई में परिवर्तित हो जाएगी और लम्बी खिंचेगी और इसकी निष्पत्ति रिश्ते में दरार पड़ने, रूखापन आने यहाँ तक की टूटने तक की नौबत आ जाती है।
आज के दौर में प्रतिस्पर्धा, चकाचौंध और नीरसता की वजह से इंसान चिड़चिड़ा और अहंकारी हो चुका है। आपसी रिश्ते में रोजमर्रा की लड़ाइयां और लम्बे समय तक बातचीत का रुक जाना इन्ही मानसिक स्थितियों के कारण होता है। रोजाना ध्यान मैडिटेशन करने से मानसिक स्थिति सुधरती है।
जीवन में हमेशा आशावादी होना चाहिए। यदि आप या आपका साथी किसी कुंठा में जी रहा है तो उसका साथ दीजिये। ना की उसके व्यवहार के बारे में शिकायती हो जाइये। हर चीज़ की एक वजह होती है। जो आप देंगे वही वापस मिलेगा।
यदि आप आशावादी, शांत, विवेकशील हो जाते हैं तो आपके रिश्ते आजीवन चलने वाले, प्रेम और वफादारी से भरे हुए ही रहेंगे।
आशा करता हूँ की yeh rishte hai pyar ke का ये लेख आपको पसंद आया होगा। आगे भी इसी तरह के लेख आते रहेंगे। आप हमारे ब्लॉग से जुड़ सकते हैं.